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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005

सूचना का अधिकार अधिनियम बिल दिनांक 11 मई 2005 को लोकसभा में और दिनांक 12 मई 2005 को राज्यसभा में पास किया गया था।

प्रत्येक लोक प्राधिकारी के कार्यकरण में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के संवर्धन के लिए, लोक प्राधिकारियों के नियंत्रणाधीन सूचना तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों के सूचना के अधिकार की व्यावहारिक शासन पद्धति स्थापित करने, एक केन्द्रीय सूचना आयोग तथा राज्य सूचना आयोग का गठन करने और उनसे संबंधित या उनसे आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम।

भारत के संविधान ने लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना की है;

और लोकतंत्र शिक्षित नागरिक वर्ग तथा ऐसी सूचना की पारदर्शिता की अपेक्षा करता है, जो उसके कार्यकरण तथा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भी और सरकारों तथा उनके परिकरणों को शासन के प्रति उत्तरदायी बनाने के लिए अनिवार्य है;

और वास्तविक व्यवहार में सूचना के प्रकटन से संभवत: अन्य लोक हितों, जिनके अंतर्गत सरकारों के दक्ष प्रचालन, सीमित राज्य वित्तीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग और संवेदनशील सूचना की गोपनीयता को बनाए रखना भी है, के साथ विरोध हो सकता है; 

और लोकतंत्रात्मक आदर्श की प्रभुता को बनाए रखते हुए इन विरोधी हितों के बीच सामंजस्य बनाना आवश्यक है;

अत:, अब यह समीचीन है कि ऐसे नागरिकों को, कतिपय सूचना देने के लिए, जो उसे पाने के इच्छुक हैं, उपबंध किया जाए;


सूचना अधिकार का अधिनियम 2005

सूचना अधिकार अधिनियम, 2005 का मुख्य लक्षण 

  • सूचना अधिकार सभी नागरिकों पर निहित है।
  • किसी रूप के रिकार्ड में किसी ढंग की सूचना, दस्तावेज़, ई-मेल, परिपत्र, प्रेस विज्ञप्ति, संविदा, नमूना या एलेक्ट्रोनिक डेटा आदि सूचना शब्द में निहित है।
  • कार्य का निरीक्षण, दस्तावेज़, रिकार्ड तथा इसके प्रमाणित प्रतिलिपि तथा सूचना का किसी इलेक्ट्रोनिक मोड जैसे डिस्केट्ट्स, सूचना फ्लोप्पीस, टेप्स, वीडियो कासेट्स या कंप्यूटर्स में स्टोर की गई सूचना आदि सूचना के अधिकार में सम्मिलित है।
  • साधारण मामले में सूचना के लिए दी गई अपेक्षा की प्राप्ति की तिथी से 30 दिवस के अंदर  अपेक्षित  सूचना उपलब्ध किया जा सकता है।
  • यदि एक व्यक्ति के ज़िन्दगी या आज़ादी के कार्य है तो अपेक्षा की समय से 48 घंटे के भीतर सूचना उपलब्ध किया जा सकता है।
  • प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकारी लिखित अपेक्षा या इलेक्ट्रोनिक माध्यम के द्वारा प्रस्तुत अपेक्षा पर सूचना प्रावधान करने के लिए बाध्य है।
  • कुछ सूचनाएँ निषिद्ध किया जाता है।
  • तीसरी पार्टी की सूचना के लिए नियंत्रण बनाया गया है।
  • केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग द्वारा लिए गए निर्णय के खिलाफ की अपील पर एक अधिकारी जो रैंक में वरिष्ठ है कर सकता है।
  • सूचना के लिए प्राप्त आवेदन को इनकार करने के लिए या सूचना प्रावाधान नहीं करने के लिए जुर्माना प्रति दिन रू.250/- पर होगा लेकिन यह जुर्माना की कुल रकम रू. 25,000/- से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • केन्द्रीय सरकार या निजी राज्य सरकार द्वारा केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को नियुक्त किया जाता है।