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कृषकों के लिए सूचना

विशेष सामाजिक आर्थिक संदर्भ में, एफ ए सी टी जो भारत में रासायनिक उर्वरकों के प्रथम बडे पैमाने का उत्पादक बन गई, परंपरागत किसानों को इन उर्वरकों की बिक्री का पूर्ण उत्तरदायित्व भी कंपनी पर पडा है। किसान, आम तौर पर इस अपरिचित नए उत्पाद के परीक्षण में अनिच्छुक थे। इससे एफ ए सी टी को मालुम हुआ कि उर्वरकों के उत्पादन एवं बिक्री से अपना काम समाप्त नहीं होता, उत्तम उत्पादन के लिए आवश्यक निदेश के रूप में उर्वरकों को स्वीकार कराने के लिए किसानों को समझाने के अलावा उचित समय में तथा उचित मात्रा में उर्वरकों को ठीक तरीके से प्रयोग में लाने का निर्देश भी दिया जाना है। इसमें विस्तृत एवं सुनिश्चित उर्वरक संवर्धन कार्यक्रम और उचित शिक्षित डीलर नेटवर्क भी शामिल किया। एफ ए सी टी ने इस उत्तरदायित्व को एक धर्मोत्साह से ही ले लिया और वैज्ञानिक कृषि में उर्वरकों के विपणन से अपने संवर्धनात्मक उद्देश्य को परिवर्धित किया।

इसे मल्टी मीडिया पब्लिसिटी केम्पेइन भी कहा जाता है। प्रेस, सिनेमा, बाहरी एवं अन्य तरीके के मुद्रित शब्द जैसे माध्यमों के प्रयोग करते समय एफ ए सी टी प्रदर्शन में विशेष ध्यान दिया जाता है और किसान के अपने कृषिक्षेत्र में खेती करते समय पडोसी किसान वहाँ पहुँचकर कार्यकलापों को खुद देख सकते हैं और उनके सामने ही परिवर्तन देख सकता है। एफ ए सी टी के फील्ड स्टाफ भी यथासंभव अधिक किसानों से मिलकर, उनसे चर्चा करके उनकी शंकाओं को दूर कर और आत्मविश्वास अर्जित कर सकते हैं। ऐसी सामूहिक चर्चाएँ जल्दी नियमित अध्ययन कक्षाओं के रूप में विकसित हुई। ये अध्ययन कक्षाएँ लगभग नियमित रूप से चलाई गई और कृषि विस्तार अधिकारियों एवं अन्य कृषि विशेषज्ञों ने इन कार्यक्रमों में सम्मिलित हुए और उनकी सहायता और सलाह किसानों के अपने कृषि उत्पादन के वर्धन के लिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कराने में विश्वास बढाया।